चंदेरी की साड़ी के किनारे एक ही डिजाइन बराबर दूरी पर लौटता है। इस दोहराव के पीछे करघे की जैक्वार्ड व्यवस्था काम करती है। बुनकर के ऊपर लगे पुट्ठे के छेद वाले कार्ड तय करते हैं कि डिजाइन किस क्रम में आगे बढ़ेगा।

चंदेरी ई-हेरिटेज के शिल्प विवरण में इसकी तैयारी दर्ज है। पहले ग्राफ पर डिजाइन बनाया जाता है, फिर उसी के अनुसार कार्ड छेदे जाते हैं। जुड़े हुए कार्ड जैक्वार्ड में लगाए जाते हैं।

पैडल दबा, अगली पंक्ति बनी

बुनकर के पैडल चलाने पर कार्ड अगली पंक्ति पर बढ़ता है। एक चक्र पूरा होने के बाद क्रम फिर शुरू होता है और बॉर्डर में डिजाइन दोहराता है। छोटे, कम जटिल बॉर्डर के लिए डॉबी व्यवस्था का भी उल्लेख है।

गाथा के बुनाई दस्तावेज में करघा तैयार करने की मेहनत दिखाई गई है। डिजाइन के मुताबिक धागों की ऊंचाई और उठने-बैठने का क्रम तय किया जाता है। रंगाई, धागे व्यवस्थित करने और करघे की सेटिंग के बाद ही बुनाई आगे बढ़ती है। तैयार साड़ी में दिखने वाला पैटर्न इसी तैयारी का नतीजा है।

मध्यप्रदेश पर्यटन चंदेरी में सूती, शुद्ध रेशमी और सिल्क-कॉटन, तीन तरह के कपड़े गिनाता है। कैरी, अशर्फी, मोर और फूल यहां के प्रचलित बुने हुए मोटिफ हैं। हल्के, महीन कपड़े पर बॉर्डर और बूटियों का यह काम उसकी पहचान बनाता है। अगली बार चंदेरी साड़ी हाथ में आए तो किनारे के दोहराव और बीच की बूटी को अलग-अलग देखिए; दोनों में बुनकर के डिजाइन संबंधी फैसले नजर आएंगे।

स्रोत और संदर्भ

  1. चंदेरी ई-हेरिटेज प्रोजेक्ट · Arts and crafts: weaving technique and borders ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. गाथा, शिल्प दस्तावेजीकरण · Chanderi weaving craft ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  3. मध्यप्रदेश पर्यटन · Chanderi Sarees: Six Yards of Woven Grace ↗1 अप्रैल 2020

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।